वयोवृद्ध साहित्यकार मुद्राराक्षस का निधन

लखनऊ। नाट्य लेखन, मंचन, कथा, व्यंग्य, कहानी, उपन्यास, आलोचना, अनुवाद और सम्पादन के साथ बहुमुखी प्रतिभा के धनी वयोवृद्ध साहित्यकार मुद्राराक्षस का लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया। 83 साल के मुद्राराक्षस काफी समय से बढ़ती उम्र में होने वाली तकलीफों से ग्रसित थे। सोमवार दोपहर में उनकी तबीयत बिगड़ी। उन्हें ट्रामा सेन्टर ले जाया गया लेकिन रास्ते में ही उनका निधन हो गया। कुछ समय पूर्व भी उन्हें सीने में दर्द की शिकायत और तेज बुखार होने के कारण पहले बलरामपुर अस्पताल, फिर केजीएमयू में भर्ती में कराया गया था। जहां कई दिनों तक उनका इलाज चला था। मुद्राराक्षस ने अपनी लम्बी साहित्यिक यात्रा में अब तक 20 से ज्यादा नाटकों का सफल निर्देशन, 10 से ज्यादा नाटकों का लेखन, 12 उपन्यास, पांच कहानी संग्रह, तीन व्यंग्य संग्रह, इतिहास सम्बन्धी तीन पुस्तकें और आलोचना सम्बन्धी पांच पुस्तकें लिखी हैं। इसके अलावा उन्‍होंने ज्ञानोदय और अनुव्रत जैसी तमाम प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं का लम्बे समय तक सम्पादन भी किया है। मुद्राराक्षस रचित तमाम पुस्तकों का कई देशों में अंग्रेजी समेत दूसरी भाषाओं में अनुवाद भी हुआ है। 15 सालों से भी ज्यादा समय तक वे आकाशवाणी में एडिटर (स्क्रिप्ट्स) और ड्रामा प्रोडक्शन ट्रेनिंग के मुख्य इंस्ट्रक्टर रहे हैं। साहित्य के अलावा समाज और सियासत से भी उनकी नातेदारी रही है। इसके साथ ही सामाजिक आंदोलनों से भी वह जुड़े रहे हैं। साहित्यकार www.yourbookstall.com लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।
मुद्राराक्षस की अन्य रचानाओं के लिए इस

No comments:

Theme images by sndr. Powered by Blogger.