विश्व के सबसे बड़े औद्योगिक त्रासदी पर ‘महाभियोग’

मध्य प्रदेश की राजधानी औद्योगिक विकास की जो निर्दय, निर्विवेक विरासत ‘भोपाल गैस कांड’ के रूप में लगभग 32 साल पहले भोपाल वासियों के ऊपर टूट पड़ी थी, वही इस उपन्यास ‘महाभियोग’ का मूल विषय है। दरअसल, यह न गैस कांड से शुरू होकर उसके बाद सालों तक इस त्रासदी को लेकर समाज, देश, सामाजिक कार्यकतार्ओं, प्रेस और न्याय व्यवस्था के चर्कव्यूह में जो चला उसकी कहानी है। नब्बे और उसके बाद जन्मे लोग, बहुत संभव है कि इस घटना के बारे में बहुत मूर्त ढंग से कुछ न सोच पाते हों, उनके लिए यह उपन्यास सिर्फ इसलिए भी जरूरी है कि शायद पहली बार किसी उपन्यास में वे विवरण आए हैं, जो उन्हें उस त्रासदी की भयावहता को महसूस करने में मदद कर सकते हैं। साथ ही उस पूरे वैचारिक, सामाजिक और प्रशासनिक-न्यायिक विमर्श को जानने में भी, जो बरसों चलता रहा। अगर हम लेखिका अंजली देशपांडे की बात करें तो वह पेशे से पत्रकार हैं। वह छात्र आंदोलन से लेकर नारी मुक्ति आंदोलनों से जुड़ी रही हैं। अंजली दिल्ली पत्रकार संघ के लिए ‘26/11’ यानी मुंबई पर आतंकी हमले की मीडिया में रिपोर्टिंग पर चर्चित समालोचना की सहलेखिका भी हैं। इन्होंने कई नुक्कड़ नाटक लिखे और उनमें अभिनय भी किया है। अंजली देश पांडे की यह किताब किसी भी आॅनलाइन बुक्स स्टोर (online bookstore) पर असानी से उपलब्ध हैं। वहां पर खरीदने (buy books online) वालों को भारी डिस्काउंट भी मिल रहा है। 

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