किताब की बिक्री से करोड़पति बन गई हैं मलाला

नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला युसुफजई और उनका परिवार किताब की बिक्री और व्याख्यानों से मिलने वाली राशि को पाकर करोड़पति बन गया है। पाकिस्तान की स्वात घाटी में तालिबान शासन के बीच अपने जीवन को मलाला ने एक किताब ‘आई एम मलाला’ (I am Malala)में लिपिबद्ध किया है। 18 वर्षीय पाकिस्तानी किशोरी कीे तालिबान ने लड़कियों के लिए शिक्षा की वकालत करने पर सिर में गोली मार दी थी। मलाला ने अपनी इस पूरी कहानी को ‘संड टाइम्स’ की पत्रकार क्रिस्टिना लैम्ब के साथ मिलकर किताब का रूप दिया है। मलाला की इस कहानी के अधिकारों की सुरक्षा के लिए गठित कंपनी के बैंक खाते में अगस्त 2015 में 22 लाख पाउंड थे और कर चुकाने से पहले उसका कुल लाभ 11 लाख पाउंड था। ‘द टाइम्स’ की खबर के अनुसार, मलाला, उसके पिता जियाउद्दीन युसुफजई और उसकी मां तूर पेकाई इस कंपनी ‘सालारजई लिमिटेड’ के संयुक्त शेयरधारक हैं। पूरा परिवार अब ब्रिटेन के बर्मिंघम में रहता है, जहां मलाला एडगबास्टन हाई स्कूल फॉर गर्ल्ड में पढ़ाई करती है। मलाला को 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया और वह नोबेल पाने वाली सबसे कम उम्र की सख्शियत है। मलाला की किताब का हिन्दी सहित विश्व के कई भाषाओं में अनुवाद हुआ है, मूल किताब कई आॅनलाइन बुक्स (online books) स्टोर पर उपलब्ध है।

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