साहित्य में ‘संभ्रांत वर्ग की दादागिरी’ का सामना कर रहा हूं: चेतन भगत

नई दिल्ली। ‘कैंपस उपन्यास’ की श्रेणी को जन्म देने वाले जानेमाने लेखक चेतन भगत (Chetan Bhagat) का कहना है कि साहित्य के क्षेत्र में वे ‘संभ्रांत वर्ग की दादागिरी’ से संघर्ष कर रहे हैं। चेतन के मुताबिक उनकी किताबों को आमतौर पर ‘कम गंभीर’ साहित्य बताकर खारिज कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अच्छा साहित्य क्या है, यह तय करने का हक विशेषाधिकार प्राप्त गिने-चुने लोगों को नहीं बल्कि समाज को है। उन्होंने कहा, हमारा देश सं्रभांतवाद पर चलता है। जब उपनिवेश का दौर खत्म हुआ तो विशेषाधिकार प्राप्त लोगों ने अच्छी पसंद और संस्कृति के मुद्दों पर चर्चा को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की। वे नहीं चाहते कि छोटे शहर का कोई व्यक्ति आए और यह कहे कि-मैं वही फैसला लूंगा जो मुझे पसंद है। चेतन ने कहा, वे कौन होते है तय करने वाले। साहित्य क्या है यह तो समाज तय करेगा। 42 वर्षीय लेखक के मुताबिक साहित्य वह है जो समाज का आईना हो जिसमें ना केवल सभ्रांत वर्ग हो बल्कि आम आदमी भी हो। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि उनकी किताबें लोकप्रिय साहित्य हैं, वे अभिजात्य किस्म की किताबें नहीं हैं। वे कहते हैं, तुलना करने की जरूरत ही क्या है? यह तो ऐसा है कि आप ‘द कपिल शर्मा शो’ देखते हुए कह रहे हों कि ‘यह बीबीसी क्यों नहीं है?’ छह किताबें लिख चुके चेतन की नई किताब ‘वन इंडियन गर्ल’(one indian girl) आई है।

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