शत्पथी की किताब 'पाप और अन्य कहानियां' लोकार्पित

साहित्य अकादमी में पारमिता शत्पथी की किताब 'पाप और अन्य कहानियां' का लोकार्पण मैनेजर पांडे, अल्पना मिश्र, अनामिका और प्रकाशक अशोक माहेश्वरी ने संयुक्त रूप से किया. राजेंद्र प्रसाद मिश्र द्वारा मूल ओड़िया से अनूदित यह किताब राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई है. यह किताब कई ऑनलाइन बुक्स स्टोर (Online bookstore) पर उपलब्ध है जहाँ से इसे आप (Buy books online) खरीद सकते है. 10-11 साल के बच्चे पर केंद्रित इस किताब की एक कहानी में बच्चा भूख के मारे एक मुर्गी को मार देता है और इसके बाद अपने पूरे परिवार को मौत तक पहुंचा देता है. यह कहानी भूख और गरीबी के विवरणों से भरी पड़ी है. पारमिता शत्पथी चर्चित कथाकार हैं. 'पाप और अन्य कहानियां' में उनकी कुछ कहानियां शामिल हैं, जिन्हें उनके संवेदना और समाज की गहरी समझ के लिए जाना गया है. पारमिता की कहानी संग्रह में समाज के वंचित दुर्बल लोगों का पक्ष लेते हुए वो साफ दिखाई देती है और खाए, पिए, अघाए लोगों के प्रति उनकी घृणा भी स्पष्ट  होती है. 'दलाल' कहानी में उन्होंने नायक को शुरू से अंत तक 'वह आदमी' कहकर ही संबोधित किया है. उसे कोई नाम नहीं दिया है. राजेंद्र प्रसाद मिश्र द्वारा मूल ओड़िया से अनूदित इन कहानियों को पढ़ते हुए ऐसा नहीं लगता कि अनुवाद पढ़ रहे हैं. वह आधुनिक समाज के निम्न तबके के दुख तकलीफों के साथ मध्य वर्ग के उथलेपन की भी गहरी समझ रखती है. 'दलाल' ऐसी ही कहानी है, जिसमें एक व्यक्ति अपने सामान्य चालाकियों से अकूत संपति अर्जित करता है, लेकिन अंत में एक चतुर लड़की के हाथों ठगा जाता है.

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